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भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य एवं गर्म जलकुंड

📍 Munger, East Bihar, Bihar

क्यों जाएँ

मुंगेर ज़िले के दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्र में एक बड़ा वन्यजीव अभयारण्य, जो अपने प्राकृतिक गर्म जलकुंडों के समूह के लिए प्रसिद्ध है — बिहार के सबसे गर्म, 52–65 °C तक। घना जंगल तेंदुए, हिरण, जंगली सूअर और समृद्ध पक्षी-जीवन को आश्रय देता है। दुर्गम, अछूता परिवेश इसे वन्यजीव और प्रकृति-प्रेमियों के लिए एक फलदायी स्थल बनाता है।

परिचय

भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य मुंगेर ज़िले के दक्षिणी भाग की वनाच्छादित पहाड़ियों में, खड़गपुर श्रेणी में फैला है। यह अपने प्राकृतिक गर्म जलकुंडों के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध है — भीमबांध के कुंड बिहार के सबसे गर्म हैं, जिनका तापमान लगभग 52–65 °C तक रहता है, और इनके खनिज जल को औषधीय माना जाता है।

यह अभयारण्य तेंदुए, सांभर व चीतल हिरण, जंगली सूअर और अनेक प्रकार के पक्षियों को आश्रय देता है, जो धाराओं, पहाड़ियों और घने जंगल के बीच बसे हैं। इसकी दुर्गमता इसे शांत और अछूता बनाए रखती है, जो वन्यजीव और एकांत चाहने वालों के लिए आदर्श है।

  • सूचना: सार्वजनिक परिवहन अभयारण्य तक नहीं पहुँचता; निजी वाहन या दोतरफा कैब आवश्यक है। सुविधाएँ बुनियादी हैं, इसलिए पानी व सामग्री साथ रखें, और प्रवेश एवं समय के बारे में वन विभाग से पूछ लें।

कैसे पहुँचें

  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा पटना (~200 किमी) है।
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलहेड जमुई रेलवे स्टेशन (20 किमी) और बरियारपुर स्टेशन (45 किमी) हैं; मुंगेर लगभग 55 किमी दूर है।
  • सड़क मार्ग: मुंगेर (~55 किमी, 1.5–2 घंटे) से NH-333 द्वारा और भागलपुर या पटना से पहुँचा जा सकता है; अभयारण्य तक कोई सार्वजनिक परिवहन न होने से निजी वाहन आवश्यक है।

घूमने का सही समय

नवंबर से मार्च, जब मौसम सुहावना रहता है और वन्यजीव दिखने की संभावना अधिक होती है।

आसपास के स्थल

गंगा नदी को देखता मुंगेर किले की प्राचीर और प्रवेश द्वार किले व महल

मुंगेर किला

📍 Munger

गंगा के दक्षिणी तट पर एक ऐतिहासिक नदी किनारे का किला, जो एक चट्टानी उभार पर बना है और कभी मध्यकालीन शासकों का गढ़ था। 18वीं सदी में यह बंगाल के नवाब मीर क़ासिम का ठिकाना रहा। इसकी दीवारों के भीतर पुराने द्वार, महल, मक़बरे और औपनिवेशिक इमारतें तथा नदी के सुंदर दृश्य हैं।

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प्रकृति व झरने

सीता कुंड गर्म जलकुंड, मुंगेर

📍 Munger

मुंगेर के पास एक पूजनीय प्राकृतिक गर्म जलकुंड, जो कथा में रामायण की सीता की अग्नि परीक्षा से जुड़ा है। मुख्य गर्म कुंड के चारों ओर राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न कुंड नाम के ठंडे जलकुंड हैं। इसके भूतापीय जल को उपचारक गुणों वाला माना जाता है, जो तीर्थयात्रियों और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करता है।

कल्पवास के दौरान सिमरिया घाट पर गंगा तट पर श्रद्धालु नदियाँ व घाट

सिमरिया धाम, गंगा घाट

📍 Begusarai

बेगूसराय में बरौनी के पास स्थित एक पूजनीय गंगा तीर्थ घाट, जिसे मिथिला के राजा जनक की तपोभूमि माना जाता है। हर साल यहाँ नदीतट पर महीने भर चलने वाला कल्पवास मेला लगता है, जिसमें हज़ारों श्रद्धालु स्नान और तप के लिए आते हैं। यह महान हिंदी कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की जन्मस्थली भी है, जो इसकी आध्यात्मिक ख्याति में साहित्यिक गौरव जोड़ती है।

कबरताल (कांवर झील) की विशाल आर्द्रभूमि पर प्रवासी जलपक्षी वन्यजीव व अभयारण्य

कांवर ताल (कबरताल) पक्षी अभयारण्य

📍 Begusarai

एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की गोखुर झील और बिहार का पहला रामसर स्थल — बेगूसराय के मंझौल के पास एक चमकती आर्द्रभूमि। सर्दियों में यह मध्य एशियाई फ्लाईवे के हज़ारों प्रवासी जलपक्षियों का ठिकाना बनती है, जहाँ 200 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ दर्ज हैं। यह पक्षीप्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए स्वर्ग है, जिसे भोर में नाव से देखना सबसे अच्छा है।

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