ऐतिहासिक व खंडहर गोलघर, पटना
1786 में अंग्रेज़ों द्वारा अकाल से बचाव हेतु राजकीय अन्न भंडार के रूप में बनाया गया मधुमक्खी के छत्ते जैसा भव्य गोलघर। इसकी दो बाहरी सर्पिल सीढ़ियाँ (प्रत्येक में 145 पायदान) ऊपर तक जाती हैं, जहाँ से गंगा और पटना का विहंगम दृश्य दिखता है। यह शहर की सबसे पहचानी जाने वाली औपनिवेशिक धरोहरों में से एक है।