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🎪 मेले व त्योहार

3 स्थल मिले

गहरे रंगों वाली मधुबनी (मिथिला) चित्रकला जिसमें दोहरी रूपरेखा वाली आकृतियाँ हैं मेले व त्योहार

मधुबनी: मिथिला चित्रकला क्षेत्र

📍 Madhubani

मधुबनी (मिथिला) चित्रकला का केंद्र, जो मिथिला क्षेत्र की सदियों पुरानी लोक कला परंपरा है और मुख्यतः महिलाओं द्वारा निभाई जाती है। 2007 में भौगोलिक संकेत (GI) टैग से मान्यता प्राप्त यह कला जितवारपुर और रांटी जैसे गाँवों में जीवंत होती है, जहाँ आप कलाकारों से मिल सकते हैं, उन्हें काम करते देख सकते हैं और सीधे उनसे प्रामाणिक चित्र खरीद सकते हैं।

गंडक के किनारे विशाल सोनपुर पशु मेले में भीड़ और पशु मेले व त्योहार

सोनपुर मेला (पशु मेला)

📍 Saran

एशिया के सबसे बड़े और पुराने पशु मेलों में से एक, जो हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा और गंडक नदियों के पवित्र संगम पर लगता है। महीने भर चलने वाला यह भव्य आयोजन पशु व्यापार, लोक प्रस्तुतियों, हस्तशिल्प दुकानों और सामूहिक पवित्र स्नान का मेल है, जो पूरे भारत व उससे परे के तीर्थयात्रियों व दर्शकों को आकर्षित करता है।

गया में फल्गु नदी के तट पर पिंडदान अनुष्ठान करते तीर्थयात्री मेले व त्योहार

गया जी पिंडदान एवं पितृपक्ष मेला

📍 Gaya

गया भारत का सबसे प्रमुख पिंडदान स्थल है — पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का हिंदू अनुष्ठान। वार्षिक पितृपक्ष मेले के दौरान लाखों तीर्थयात्री फल्गु नदी पर श्राद्ध करने और ऐतिहासिक विष्णुपद मंदिर में पूजा करने के लिए एकत्र होते हैं, जिससे यह देश के सबसे महत्वपूर्ण पितृअनुष्ठान तीर्थों में से एक बन जाता है।