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बोधगया के पास बकरौर गाँव में बड़ा गोलाकार ईंट का सुजाता स्तूप

Photo: Pavittar / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0

सुजाता स्तूप

📍 Gaya, South Bihar, Bihar

क्यों जाएँ

बोधगया से फल्गु नदी के ठीक पार स्थित सुजाता स्तूप गाँव की कन्या सुजाता का सम्मान करता है, जिसके खीर के प्रसाद ने बुद्ध के कठोर उपवास के वर्षों को समाप्त कर उन्हें ज्ञान की ओर मध्यम मार्ग पर अग्रसर किया। यह बड़ा प्राचीन ईंट का स्तूप उसके घर के पारंपरिक स्थल को चिह्नित करता है और बोधगया तीर्थ-परिपथ के भीतर एक शांत, कम भीड़ वाला स्थान है। यह व्यस्त महाबोधि परिसर के मुक़ाबले एक शांत ग्रामीण विश्राम प्रदान करता है।

परिचय

सुजाता स्तूप (जिसे सुजाता गढ़ भी कहते हैं) बोधगया के सामने बकरौर गाँव में स्थित है। खुदाई से पता चलता है कि यह स्तूप दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में बना और सदियों में इसका विस्तार हुआ, जो सुजाता के प्रसिद्ध प्रसाद से जुड़े स्थल को चिह्नित करता है। इसकी यात्रा पास के सुजाता मंदिर और फल्गु नदी-तल के पार टहलने के साथ अच्छी तरह जुड़ जाती है।

देखने योग्य मुख्य चीज़ें:

  • सुजाता स्तूप — एक चौड़ा, गोलाकार ईंट का टीला, बोधगया क्षेत्र की सबसे प्राचीन संरचनाओं में से एक।
  • सुजाता मंदिर — पास ही सुजाता को समर्पित एक छोटा मंदिर।
  • फल्गु के पार के दृश्य — दूर बोधगया और महाबोधि शिखर के।

कैसे पहुँचें

  • हवाई मार्ग: गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (15 किमी) बहुत पास है; पटना हवाई अड्डा (110 किमी) से अधिक उड़ानें मिलती हैं।
  • रेल मार्ग: गया जंक्शन (~15 किमी) निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन है।
  • सड़क मार्ग: स्तूप महाबोधि मंदिर से फल्गु नदी के पार लगभग 2–3 किमी है; बोधगया से ऑटो और टैक्सी चलती हैं।

घूमने का सही समय

अक्टूबर से मार्च, बोधगया और बकरौर के बीच सुखद पैदल यात्रा के लिए आदर्श।

आसपास के स्थल

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📍 Gaya

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📍 Gaya

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📍 Gaya

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